कुछ लोग, हर पल कुछ ना कुछ सोचते रहते हैं, वे ऐसा क्या सोचते हैं, कैसे सोचते हैं कि उनका तन- मन बीमार पड़ जाता है, बेवजह की चिंताएँ, उन्हें घेर लेती हैं, वे चाहकर भी चिंताओं से मुक्त नही हो पाते हैं l कुछ घर की चिंता, कुछ परिवार की चिंता, कुछ अपनों की चिंता, कुछ परायों की चिंता, कुछ काम करने की चिंता, कुछ काम नही मिलने की चिंता, कुछ पैसा नही होने की चिंता, कुछ पैसा अधिक होने की चिंता, कुछ पैसा खर्च करने की चिंता, कुछ पैसा बढ़ाने की चिंता, कुछ धन-सम्पति बढ़ाने की चिंता, कुछ घर-परिवार बढ़ाने की चिंता, कुछ घर-परिवार संभालने की चिंता, कुछ शादी-विवाह की चिंता, हर तरफ चिंता ही चिंता, किसी को खोने की चिंता, किसी को पाने की चिंता, हर किसी को चिंता ही चिंता, क्या हम केवल चिंताएँ करने के लिए बने हैं, इन चिंताओं के कारण, लोग मुस्कुराना ही भूल गए हैं, क्यों नहीं हम सुकून से अपना ये सुंदर जीवन जी पाते हैं l अगर इंसान स्वयं को चिंताओं से मुक्त रखे ...