कुछ कहने का मन है

कुछ कहने का मन है, 
पर क्या कहें हम, 
कुछ होठों पर बात है, 
पर कैसे कहें हम, 
कुछ मन में बात है, 
कुछ दिल में बात है, 
कुछ बोलना तो चाहे, 
पर कैसे बोलें हम l

कभी मंजिल हमसे से दूर हैं, 
कभी हम मंजिल से दूर हैं, 
कभी कुछ खोने का डर है, 
कभी कुछ पाने की आस है, 
इस जीवन के कुछ ख्वाब है, 
पर कैसे पूरे करें हम l

कुछ उलझन जीवन में आती है, 
कुछ उलझन सुलझ जाती है, 
कुछ उलझन इस जीवन को, 
और अधिक उलझाती है, 
कभी किस्मत रूठ जाती है, 
कभी किस्मत चमक जाती है, 
कुछ तो दिल में बात है, 
पर कैसे कहें हम l


Thank You. 

Comments