क्या अपनी मंजिल का पता है कि जाना कहाँ है,
क्या अपने मकसद का पता है कि पाना क्या है,
कभी याद रहे, कभी भूल जाएं,
ऐसे ही जिंदगी चल रही है,
क्या अपने लक्ष्य का पता है कि पाना क्या है l
यूं तो हर कोई जानता है कि उसकी चाहत है क्या,
पर क्या उनके लिए सही है, यह भूल जाते हैं,
चल पड़े सब काम की खातिर, अपनी मंजिल पाने को,
ऐसे ही हर दिन गुजर रहा है, ऐसे ही जीवन चल रहा है,
क्या अपने मन का पता है कि जाना कहाँ है l
कौम बेवजह अपना समय खराब करता है,
हर कोई चाहता है कि उसकी दुनियाँ सँवर जाए,
कोशिशें तो बहुत करते है, लेकिन मंजिल हाथ नही लगती है,
मुस्कुराना तो चाहते है, लेकिन मुस्कुराहट
हरदम चेहरे पर नही रहती है,
क्या अपने कर्मों का पता है कि मिलना क्या है l
Thank You.
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