जहाँ जाऊँ, वही तू,
जिधर देखूँ, वही तू,
जिधर देखूँ, वही तू,
तू सर्वत्र, तू सर्वव्यापक,
तू ही अंदर, तू ही बाहर,
तू धरती में, तू अम्बर में,
तू हवा में, तू ही जल में,
कण-कण में तू ही बसा है,
मुझमें तू, तुझमें तू l
तू ही सत्य, जो सबको देखे,
तू ही बोले, तू ही सुने,
तू ही सोचे, महसूस करे,
तू ही सबके, सब दुख हरे,
रोम-रोम में तू राम रमा है,
तुझसे खाली कुछ भी नही,
तु पूर्ण, तू ही परिपूर्ण,
सब लोकों में तू ही तू l
सारी सृष्टि में तेरा आनंद फैला,
हर युग में, नित्य-निरंतर,
सब लोकों में तू ही मिलता,
ये जगत नही है तेरे बिन,
जीव-जीव में आप समाया,
तूने ही सब खेल रचाया,
अनंत सृष्टि तूने बनाई,
अनंत जीवन तूने बनाया,
जीवन देने- लेनेवाले पर्मेश्वर,
तेरी शरण में मैं, एक तू ही तू l
Thank You.
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