चंचल मन ये उड़न लगाए

चंचल मन ये उड़न लगाए,
कभी कहीं, क़भी कहीं को जाए,
इस दुनियाँ में इसका राज है चलता,
अपनी ये तो बात मनवाए ।

भटका फिरता रहता है ये,
बिचला फिरता रहता है ये,
कभी कुछ सोचे, कभी कुछ बोले,
कुछ तो कहता रहता है ये,
इस मन के भेद कोई नही पाए ।

झूठी जिद्द के आगे ये तो,
जीवन का नुकसान है करता,
लालच में है वास है इसका,
जिधर जाए, वही ललचाए ।

Thank You.

Comments

Popular posts from this blog

What you think