जैसा मन, वैसी बात है
जैसा मन, वैसी बात है,
जितना मन, उतनी बात है,
जितना मन, उतनी बात है,
या तो कुछ भी ना कहे,
जब कहने लगे
तो फिर कहते ही रहे,
जैसी चाह, वैसी राह है ।
इस मन को तो कोई आराम नही,
ये तो हरदम भागा फिरता है,
एक जगह ये रहता नही है,
ये मन तो सोचता रहता है,
ये तो हरदम भागा फिरता है,
एक जगह ये रहता नही है,
ये मन तो सोचता रहता है,
नई बात इस मन में नही आती,
कभी खुश है तो कभी उदास है ।
अपनी बात ना ये करता है,
औरो की बात ये करता है,
औरो की बात ये करता है,
अपनों साथ ये करता है,
औरों का साथ ये करता है,
खुशियाँ पाना चाहता है ये,
पर इस मन के ना हाथ-पाँव है ।
Thank You.
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