ये मन तो क्या-क्या चाहे
ये मन तो क्या-क्या चाहे,
ये मन, खुद ही खुद से छिपाये,
बेचैन सा रहता है ये,
क्या-क्या सोचता रहता है ये,
क्या-क्या करता रहता है ये,
इस मन पर अंकुश कौन लगाए l
ये दुनियाँ की बातों में मग्न है,
सच-झूठ से ये बेखबर है,
करता है ये झूठे वायदे,
रखता है ये बेमतलब के इरादे,
इस मन को कौन समझाए l
आज में कभी ये नही रहता है,
कल की फिक्र में खोया रहता है,
भूल जाता यहाँ क्या सही है,
कल्पनाओं में फिरता रहता है,
ये किसी को चैन नही देता,
इस मन पर कौन विश्वास जमाए l
Thank You.

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