क्या उत्तम

कर्म कौन सा उत्तम,
अपने लिए,
दूसरों के लिए,
या परमात्मा के लिए ।
 
ज्ञान कौन सा उत्तम,
अपना,
दुनियाँ का,
या परमात्मा का ।

क्या हम सांसारिक कर्म को ही उत्तम मानते हैं,
या हम अपने लिए किए गए कर्म को उत्तम मानते हैं,
या हम परमात्मिक कर्म का उतम मानते हैं,
फिर सर्वश्रेष्ठ कर्म कौन सा है ।

क्या सांसारिक ज्ञान के बिना,
हमारा इस दुनियाँ में गुजारा हो सकता है,
क्या हम स्वयं को जाने बिना,
इस संसार में सुखी रह सकते हैं,
क्या हम परमात्मिक ज्ञान के बिना,
इस संसार में आनंदित रह सकते हैं,
जरा विचार करो, क्या सही है ।


Thank You.

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