तेरी हरि से प्रीति हो जाए
तेरी हरि से प्रीति हो जाए,
तेरी प्रभु से प्रीति हो जाए,
तेरी प्रभु से प्रीति हो जाए,
छोड़ जगत के झूठे झगड़े,
मन को करदे ईश्वर के हवाले,
मन तेरा, ईश्वर-भजन में खो जाएं ।
अंदर बाहर हरि का वासा,
काहे मन होता है उदासा,
काहे मन होता है उदासा,
पा ले सुख तू राम-भजन में,
चल ले प्यारे प्रभु शरण में,
तेरी चिंता सारी, खो जाए ।
झूठा जग है, झूठे बंधन,
काहे तू है, व्याकुल ऐ मन,
तेरा तो उद्धार तभी है,
जब तू करले, हरि का सुमिरन,
विश्व की तू खुशियाँ सारी पा जाए ।
Good morning
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