कभी कुछ नही करके भी देखो

कभी कुछ नही करके भी देखो, 
कभी सब छोड़कर भी देखो, 
शांत मन और, शांत चित, 
वैरागी मन, शांत जीवन, 
क्या चाहा और क्या पाया, 
क्या खोया और क्या पाया, 
कभी बेवजह खुश रहकर भी देखो l

कितने वर्षों से कुछ करते ही आ रहे हैं, 
कितना करते हैं और क्या बचा रहे हैं ! 
हिसाब लगायेंगे तो पायेंगें, कुछ बचा ही नही, 
किसके लिए, इस दुनियाँ में सब किये जा रहे हैं, 
कभी मन को मुक्त करके भी देखो l

जो होना है, वाह तो हो ही जाता है, 
जो मिलना है, वाह तो मिल ही जाता है, 
जिसे जाना है, वह तो चला ही जाता है, 
और जिसे आना है, वह तो आ ही जाता है, 
कितनी दुनियाँ की फिक्र करोगे, 
कभी खुद को खुश करके भी देखो l


Thank You. 

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