कभी तो अपने इस मन को रोक लें

कभी तो अपने इस मन को रोक लें, 
कभी तो अपने इस मन को टोक लें, 
ये मन ही कारण है सब जघड़ों का, 
ये मन ही तो कारण है सब विपतियों का, 
कभी तो अपने इस मन को मोड़ लें l

ये मन ही तो इंसान को, 
जैसा चाहे नाच नचाता है, 
ये मन ही तो दुनियाँ में
भटकता जाता है, 
कभी तो अपने इस मन पर जोर दें l

जुबान पर, हाथ-पैरों पर
ये मन अधिकार जमाए है, 
ये मन ही तो दुनियाँ में, 
जैसा चाहे करवाए है, 
कभी तो ये मन होश में रहे  l


Thank You. 

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