किसके पास कितनी जिंदगी है
किसके पास कितनी जिंदगी है,
यह कोई नही है जानता,
किसके पास कितनी साँसें है,
यह कोई नही है जानता,
फिर कैसी ये बेरुखी है,
फिर कैसा बेगानापन है,
क्यों नही यहाँ जीयें प्यार से,
यहाँ हर किसी से है वास्ता l
क्यों किसी का दिल दुखाए,
क्यो किसी को नुकसान पहुचाएं,
अपने कर्म अपने हाथों में,
क्यों ना यहाँ पुण्य कमाएं,
जिसने जीवन दिया है सबको,
क्यों ना उसका शुक्र मनाएं,
सबसे प्यार का व्यवहार करें,
क्यों ना जग में प्यार फैलाएं,
खुशियाँ बांटें इस दुनियाँ में,
मिले खुशियों का सबको रास्ता l
क्यों ना जीवन की कद्र करें,
सबका जीवन है अनमोल यहाँ पर,
हर साँस है बेशकीमती,
क्यों नही साँस-साँस हरि-सुमिरन करें,
जिससे मिली है जिंदगी, उसको सौपें,
उसमें रहे नित्य आस्था l
Thank You.
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