इस मन का ईलाज क्या है

इस मन का ईलाज क्या है,
जो कभी कुछ सोचता है, 
कभी कुछ सोचता है, 
कभी ये अच्छा सोचता है, 
कभी ये बुरा सोचता है, 
कभी ये कुछ करवाता है, 
कभी कुछ करवाता है, 
इस मन की ख्वाइशें क्या है  l

मन तो एक बच्चे की तरह है, 
मन तो एक बन्दर की तरह है, 
ये मन तो है चंचल बड़ा ही, 
ये मन तो एक कोव्वे की तरह है, 
मन तो है चालाक बड़ा है, 
हर कोई इससे परेशान रहता है l

जो कोई इस मन की नही माने, 
वो तो इस मन को पहचाने, 
जो मन को व्यस्त है रखता, 
वो तो इसकी चाल को जाने, 
जो कोई मन की करता उपेक्षा, 
वो तो जीवन को सँवारे, 
मन जिस पर सवार है होता, 
मन उसका बड़ा नुकसान करता है  l

मन लगा जो, प्रभु-भक्ति में, 
फिर समझो, कल्याण हो गया, 
मन करे जो, सुमिरन रब का, 
फिर समझो, भव से पार हो गया, 
मन के खेल समझ नही आए, 
कोई बिरला मन को जीत पाता है  l


Thank You. 

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