ख्वाबों-ख्यालों की जिंदगी है ये

ख्वाबों-ख्यालों की जिंदगी है ये,
सपनों-चाहतों की जिंदगी है ये, 
कुछ करने को जिंदगी है ये, 
कुछ खोने-पाने को जिंदगी है ये l

हर रोज समय गुजरता है, 
दुनियाँ की भीड़-भाड़ में, 
सुबह निकले हैं काम की खातिर, 
शाम को घर को आना है, 
कुछ चलने की जिंदगी है ये,
कुछ रुकने की जिंदगी है ये l

अपनी धुन में चलते जाते हैं, 
आगे को बढ़ते जाते हैं, 
कुछ पल तो खामोश है रहते, 
फिर दुनियाँ बातों में लग जाते हैं, 
कुछ यादों-वादों की जिंदगी है ये, 
कुछ ईरादों की जिंदगी है ये  l

Thank You. 

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