छोड़ूं अपनी जिद्द सारी मैं,
खुशियों से कर लूं, यारी मैं,
ये मन जो बिचला फिरता है,
ये मन जो उलझता फिरता है,
इस मन की छोड़ूं, यारी मैं ।
खामोश सा बनकर जीना है,
यहाँ साधारण जीवन जीना है,
दिखावे में क्या रखा है,
जो पास है, संतुष्ट उसमें होना है,
हरिनाम से कर लूं, यारी मैं ।
ये दुनियाँ तो, मन भटकाती है,
ये लालच में फंसाती है,
लोगों को गलत कामों में,
ये दुनियां तो फंसाती है,
सीधे-साधे, इस जीवन में,
ईश्वर का बनूं, आभारी मैं ।
Good morning 🌄
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