यहाँ हर कोई, किसी ना किसी से सीखता है
यहाँ हर कोई, किसी ना किसी से सीखता है,
यहाँ हर कोई, किसी ना किसी को सिखाता है,
यहाँ हर कोई, किसी ना किसी को सिखाता है,
यहाँ हर कोई गुरु है, यहाँ हर कोई चेला है,
गुरु भी सीखता है, चेला भी सीखता है ।
क्योंकि ज्ञान का कोई अंत नही है,
अगर दुनियाँ में अज्ञान फैला है तो,
संपूर्ण ब्रह्मांड में ज्ञान भी फैला है,
सब आत्माएं ज्ञान का भंडार है,
हर किसी से कोई ना कोई शिक्षा मिलती है,
कोई स्वयं से सीखता है,
कोई स्वयं की गलतियों से सीखता है ।
कोई कल से सीखता है,
कोई आज से सीखता है,
कोई भी यहाँ सम्पूर्ण नही है,
संपूर्ण तो एक वह परमात्मा है,
जो कोई गलती नही करता है,
वरना हर किसी से कोई ना कोई,
छोटी या बड़ी गलती हो जाती है ।
लेकिन जो कोई भी कार्य,
सोच-विचार कर किया जाता है,
वह कार्य सफल हो जाता है,
जितना ज्यादा अभ्यास होगा,
उतनी गलतियाँ कम होगी,
आप जितने ज्यादा अपने कार्य में पारंगत होगे,
उतने अधिक सफल होगें,
और सफलता ही हर कार्य का अंतिम लक्ष्य है ।
Thank You.

Comments
Post a Comment