दुनियाँ के भले की सोचो
दुनियाँ के भले की सोचो,
दुनियाँ के विनाश की मत सोचो,
दुनियाँ के विनाश की मत सोचो,
दुनियाँ में ऐसे काम करो
कि वह ईश्वर भी खुश हो जाये,
दुनियाँ में ऐसे काम करो
कि सारी जनता खुश हो जाये,
सिर्फ़ अपने बारे में मत सोचों,
औरों के लिए भी अच्छा सोचो ।
ऐसे काम करो दुनियाँ में,
तुम्हारे बाद भी दुनियाँ याद करो,
छोड़ दो, खुदगर्जी रखना,
लोग तुम्हारे अच्छे कामों को याद करें,
हमेशा स्वार्थ का जीवन नही अच्छा,
कभी निस्वार्थ बनकर भी जीयो ।
जीवन का विकास हो,
और दुनियाँ का विकास हो,
खुशियाँ इस जग में उपजे,
और जीवन में ज्ञान-विज्ञान हो,
सारा जग ये करे प्रगति,
चिंताएं सबकी दूर हो,
मन में कोई भय नही हो,
जीवन के उच्च आयाम हो,
छोड़ो ईर्ष्या-द्वेष यहाँ पर,
प्रेम की भाषा बोलो ।
Thank You.

Comments
Post a Comment