कौन समझा है, इस जीवन को
कौन समझा है, इस जीवन को,
सब इस नदी में, बहते जा रहे हैं,
सब इस नदी में, बहते जा रहे हैं,
सागर तो वह परमात्मा है,
सागर में सब, समाते जा रहे हैं l
जिसने छोड़ी, मनमर्जी करनी,
उसको ही, यहाँ ज्ञान हुआ है,
कौन जानता है, आगे क्या होगा,
सब अनुमान, लगाते जा रहे हैं l
जिसने जोड़ा है, खुद को, उस प्रभु से,
उसका दुनियाँ में आना, सफल हुआ है,
जिसने, खुद को जोड़ा है, उसकी प्रकृति से,
उसे जीवन में, आनंद के पल मिल रहे है l
छोड़के सब कुछ, एक दिन चलना है,
उससे सबको, एक दिन मिलना है,
जिसने जीया है, एक-एक पल को,
उसके जीवन में, खुशियों के पल आ रहे हैं l

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