तू जीतना चाहता है, इस दुनियाँ से
तू जीतना चाहता है,
इस दुनियाँ से,
लेकिन क्या तू,
लेकिन क्या तू,
इस दुनियाँ से जीत पाएगा,
तू तो कहता है,
मैं ही हूँ बस,
लेकिन क्या तू,
इस दुनियाँ को समझ पाएगा।
यहाँ बड़े-बड़े धुरंधर है,
जो इस धरती पर,
पाँव जमाकर बैठे हैं,
जो समझते हैं,
बस में ही मैं हूँ,
जो हर जंग में जीत जाते हैं,
सोच अगर सही हो तो,
दुनियाँ में खुशी से जी पाएगा ।
छोड़ दे, मन क्या चाहता है,
देख ले, तू क्या चाहता है,
देख ले, तू क्या चाहता है,
समझ ले ये दुनियाँ क्या हो,
जान ले, ये जीवन क्या है,
जितना खुद को तू समझाएगा,
उतना ही, अच्छी तरह से जी पाएगा,
छोड़ दे, बेवजह की जिद्द करना,
जो तेरे लिए नही अच्छी है,
अगर तेरी भावना अच्छी,
फिर तो तू , मनचाही मंज़िल पाएगा ।
Thank You.

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