जब मन मेरा नही माने

जब मन मेरा नही माने,
जब ये बनाए, कई बहाने,
जब जिद्द ये करनी शुरू करे,
जब ये बातें बनानी शुरू करे,
फिर इस मन की कोई क्यों माने ।

ये तो खेल कई खेलता है,
ये तो वक्त पे धोखा देता है,
ये तो सपने कई दिखाता है,
ये तो मुझको बहुत समझाता है,
फिर मन पर विश्वास करे क्यों ?

कुछ बातें, इसको अच्छी हैं,
कुछ कहानी, इसको सच्ची है,
जो मन जीता, वहीं सिकंदर है,
जो मन समझा, वही समझदार है,
अच्छा है, इस मन की, हर बात ना माने ।



Thank You. 

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