इस संसार ने तुम्हे क्या दिया है
इस संसार ने तुम्हे क्या दिया है,
जो इसे पकड़े बैठे हो,
तन मन और इच्छाओं से,
इस संसार में ऐसा क्या है,
जो तुम इसे छोड़ ही नही सकते,
शायद इसलिए कि तुम यह सोचते हो
कि यह संसार ही तुम्हारा सब कुछ है,
इसी से तुम्हे सब कुछ मिलता है,
जीने की खुशी मिलती है,
लेकिन विचार करोगे तो पाओगे
कि इस संसार से तुम्हे खुशी कम मिली है
और दुख अधिक मिले हैं,
इस संसार ने तुम्हें
इधर उधर भटकने पर मजबूर कर दिया है,
जो इसे पकड़े बैठे हो,
तन मन और इच्छाओं से,
इस संसार में ऐसा क्या है,
जो तुम इसे छोड़ ही नही सकते,
शायद इसलिए कि तुम यह सोचते हो
कि यह संसार ही तुम्हारा सब कुछ है,
इसी से तुम्हे सब कुछ मिलता है,
जीने की खुशी मिलती है,
लेकिन विचार करोगे तो पाओगे
कि इस संसार से तुम्हे खुशी कम मिली है
और दुख अधिक मिले हैं,
इस संसार ने तुम्हें
इधर उधर भटकने पर मजबूर कर दिया है,
और तुम सोचते हो
कि तुम इस संसार में बहुत खुश हो ।
क्या तुम उस भी वस्तु, इंसान, प्राणी,
जगह के बिना इस दुनियाँ में रह सकते हो,
जिससे तुम बेहद प्यार करते हो,
जिसके बिना तुम स्वयं को अधूरा समझते हो,
वास्तव इन सब चीजों से हमारा मन जुड़ा है,
जो इनको छोड़ना ही नही चाहता,
वरना एक संकल्प, एक सोच,
इस जीवन को पूरी तरह बदल सकती है,
पर ऐसा आवश्यक क्यों है
कि हमें यह संसार मन से छोड़ देना चाहिए,
क्योंकि यह संसार दुखों का घर है,
और असली और अनंत सुख तो
परमात्मा के नाम में ही है ।
असल बात तो यह है
कि कोई भी इस संसार में सदैव के लिए नही आता है,
जो आया है उसे जाना ही पड़ता है,
फिर क्यों नही मन को संसार से मुक्त रखा जाए,
हम इस संसार में रहे तो सही
लेकिन एक मुसाफिर की तरह,
कुछ भी खाएं पीएं,
संसार के संसाधनों का उपयोग और उपभोग करें
लेकिन विवेक के साथ,
संसार की भावनाओं में बह नही जाए,
और दुनियाँ में आए हैं तो परहित के काम करें,
स्वयं को अनंत परमात्मा का हिस्सा समझें,
प्रकृति और परमात्मा के द्वारा बनाए गए जीवों से प्रेम करें,
और अपने मन को राग द्वेष से रहित रखें ।
Thank You.
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