कभी तो अपनी जिद्द छोड़ूँ

कभी तो अपनी जिद्द छोड़ूँ ,
कभी तो अपने मन को मोड़ूँ,
क्या पाया, इस अहंकार में,
सब खोया, इस अहंकार में,
चिंता बढ़ती, हर पल निरंतर,
मन रोया, इस अहंकार में,
कभी तो में, चिंता अपनी छोड़ूँ ।

आशा-तृष्णा, मन की छोड़ूँ,
मन को हरि-चरणों संग जोड़ूँ,
ईश्वर-भजन में, समय जो गुजरे,
हरिनाम से खुशियाँ बिखरे,
हरि के नाम को मैं सुमरूँ ।

दुनियाँ की बातों में मजा क्या,
दुनियाँ की चर्चा में मजा क्या,
माया का अहंकार ना होवे,
काया का अहंकार ना होवे,
जो दिया है उस दाता ने,
उसका शुक्र करना नही छोड़ूँ ।


Thank You.

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