जिनको ईश्वर में विश्वास नही है
जिनको ईश्वर में विश्वास नही है,
उनके बारे में क्या कहें,
जो ईश्वर को कल्पना मात्र कहते हैं,
उनको क्या कहें ।
उनके बारे में क्या कहें,
जो ईश्वर को कल्पना मात्र कहते हैं,
उनको क्या कहें ।
ईश्वर तो नाम है उस शक्ति का,
जिसने सम्पूर्ण लोको का बनाया है,
ईश्वर तो नाम है उस अदृश्य शक्ति का,
जिसने सब जीवों को बनाया है,
वह हमसे पहले भी था,
हमारे बाद भी रहता है।
लोग ईश्वर पर क्यों विश्वास नही करते हैं,
क्योंकि उन्होंने उसे कभी देखा ही नही,
ईश्वर के बारे में कभी सवाल पैदा नही हुए,
अगर सवाल पैदा होगें तो उनका जवाब भी मिलेगा,
उस परमात्मा को कोई किसी नाम से पुकारता हे,
कोई किसी नाम से, कोई उसे मानता है,
कोई उसे नही जानता है,
ना तो उसके रूप से प्रेम करता है,
ना उसके स्वरूप से प्रेम करता है ।
हवा दिखाई नही देती,
लेकिन समस्त जगत में विद्यमान है,
अगर हवा नही हो तो कोई जिंदा ही नही रहे,
आकाश इतना बड़ा है कि उसमें सब सृष्टि समाहित है,
अगर उस परमात्मा का आनंद नही हो तो
कोई प्रसन्न ही नही रह पाए,
अगर जिद्द करो तो पूरी करो,
उसे जानने की, उसे महसूस करने की,
उसे देखने की, उसका आनंद प्राप्त करने की,
केवल यह कहना पर्याप्त नही है कि वह नही है,
वह कही भी नही है ।
मैं कहता हूँ वह सब जगह है,
सबमें है, वह सबमें है, और सब उसमें है,
मेरे ऐसा कहने का कोई तो आधार होगा,
और कुछ लोग कहते हैं, वह कहीं नही है,
फिर उनका ऐसा कहने का क्या आधार है,
परमात्मा तो सर्वव्यापक है, सर्वत्र है,
सर्वसमर्थ है, सबमें है, और सर्वदा है,
जरूरत है उसको महसूस करने की,
उसको जानने की,
अज्ञानरूपी अंधकार को नष्ट करने की,
तभी उसको देखा जा सकता है,
उसको समझा जा सकता है,
उसको महसूस किया जा सकता है,
उसकी कृपा महसूस की जा सकती है ।
Thank You.
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