मैं कौन हूँ, मैं कहाँ हूँ

मैं कौन हूँ, मैं कहाँ हूँ ,
मैं यहाँ हूँ या मैं वहाँ हूँ,
मैं कहाँ हूँ ।

दुनियाँ की खोज करने से अच्छा है,
खुद की खोज की जाए,
किसी को ढूँढने से अच्छा है,
खुद को ढूँढा जाए,
लगता है, मैं खो गया हूँ,
इस दुनियाँ की भीड़ में,
दुनियाँ को याद रखता हूँ,
और खुद को भूल गया हूँ,
अब तो खुद को ढूँढा जाए ।

अगर खुद को नही जान सका तो,
उस रब को कैसे जानूंगा,
अगर खुद को नही पहचान सका तो 
उस रब को कैसे पहचानूंगा,
अब खुद से मुलाकात की जाए ।

कभी तन जन्मा, कभी तन मरा,
पर मेरा जन्म-मरण कभी हुआ नही,
युगों-युगों से घूमना जग में,
किसने रचा मुझे ये भी पता नही,
मोह माया में लिपटा फिरता,
निज स्वरूप का भी ज्ञान नही,
याद किया नही जब उस ईश्वर का,
फिर मिटता मन का अज्ञान नही,
सदगुरू शरण जो हुआ नही तो 
फिर कैसे प्रभु से मिल पाऊँ,
उज्ज्वल निर्मल जो रूह हो जाए,
फिर ईश्वर से मिलन हो जाए ।


Thank You.

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