हमारे कर्म कैसे हैं




हमारे कर्म कैसे हैं, 
और हमारे विचार कैसे हैं, 
हम क्या सोचते हैं, 
और क्या करते हैं, 
क्या हमारे कर्म 
हमारे विचारों के अनुरूप है, 
कौन से कर्म सही है 
और कौन से कर्म गलत है, 
इस विषय में हर इंसान की 
अलग राय हो सकती है, 
क्योंकि इस संसार में
सबका मन अलग है, 
सबका जीवन अलग है, 
मन और कर्मों से ही तो 
जीवन बनता बिगड़ता है, 
और जो स्वयं को 
बहुत समझदार समझते हैं, 
लेकिन लोगों के हित को देखकर
लिए गए फैसले बहुत बार सही होते हैं,
यही सही समय है जब हम स्वयं को 
सकरात्मक रखते हुए जीवन गुजारे, 
हम स्वयं को आनंदित रखते हुए जीवन बिताए, 
कल-परसों को भूलते हुए, 
आज में रहे, आज को सुंदर बनाएं, 
तरह तरह की आशंकाओं से मन को दूर रखें, 
स्वयं को व्यस्त रखें, 
यही तो जीवन है, 
यह जीवन एक उत्सव है, 
इसे उत्सव की तरह मनाएं, 
एक-दूसरे की भावनाओं को समझे, 
और इस संसार में प्रसन्न रहें l

Thank You.  

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