मन कब तक तू यहाँ उलझेगा
मन कब तक तू यहाँ उलझेगा,
मन कब तक तू नही सुधरेगा,
भूला तू, अपने मालिक को,
याद ना करता, अपने ईश्वर को,
मन कब तक गम की राहों से गुजरेगा l
मन कब तक तू नही सुधरेगा,
भूला तू, अपने मालिक को,
याद ना करता, अपने ईश्वर को,
मन कब तक गम की राहों से गुजरेगा l
तू देख रहा है काया को,
तू देख रहा है माया को,
तेरी तो बात निराली है,
तेरी तो चाल निराली है,
तू देख रहा है माया को,
तेरी तो बात निराली है,
तेरी तो चाल निराली है,
तुझे जगत के भोग प्यारे हैं,
तुझे दुनियाँ के रंग प्यारे हैं,
तेरी चाहत हरदम बढ़ती रहे,
तेरी मुस्कुराहट जग में छिनती रहे,
मन कब तक तू नही बदलेगा l
मन कब तक तू नही बदलेगा l
अपनी तू शक्ति जान ले,
तू खुद को पहचान ले,
तेरा-मेरा उद्धार तभी है,
तू खुद को पहचान ले,
तेरा-मेरा उद्धार तभी है,
जो ईश्वर को तू जान ले,
अमन कब तक तू,
जगत में भटकेगा l
Thank You.

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