यह मन कितना फैला हुआ है
यह मन कितना फैला हुआ है,
यह मन कहाँ तक पहुँचा हुआ है,
पल भर में यह कहीं भी पहुँचे,
अगले पल में कहीं भी पहुँचे,
देखो मन कितना गहरा हुआ है l
यह मन कहाँ तक पहुँचा हुआ है,
पल भर में यह कहीं भी पहुँचे,
अगले पल में कहीं भी पहुँचे,
देखो मन कितना गहरा हुआ है l
सोच सोचकर यह थकता नही है,
कोई भी मौका छोड़ता नही है,
अपने अंदर कभी नही बैठे,
सफर बाहर का ये करता ही है,
इस दुनियाँ में रहकर,
कोई भी मौका छोड़ता नही है,
अपने अंदर कभी नही बैठे,
सफर बाहर का ये करता ही है,
इस दुनियाँ में रहकर,
देखो मन कितना मैला हुआ है l
कौन है लगता मन को प्यारा,
किसकी निंदा ये करने लगता है,
कभी भूलता अपनी मर्यादा,
ताने बाने ये बुनने लगता है,
मकड़ी जैसा ये जाल है बुनता,
किसकी निंदा ये करने लगता है,
कभी भूलता अपनी मर्यादा,
ताने बाने ये बुनने लगता है,
मकड़ी जैसा ये जाल है बुनता,
बाहर नही निकले, खुद ही फँस जाए,
हाथी से भी ज्यादा ताकतवर,
शेर से भी ज्यादा खूँकार है ये तो,
इसको जीतना, बेहद मुश्किल,
ये तो हरदम ललकार लगाए,
हाथी से भी ज्यादा ताकतवर,
शेर से भी ज्यादा खूँकार है ये तो,
इसको जीतना, बेहद मुश्किल,
ये तो हरदम ललकार लगाए,
मन बहके तो जीवन बहके,
मन से ये जीवन चमका हुआ है l
मन पकड़े जो सही दिशाएँ,
फिर तो ये मीत बन जाए,
अभ्यास और वैराग्य से
ये तो सही राह पर आए,
हरिभक्ति में मन जो रंगे तो
फिर तो जीवन सफल हो जाए,
ये मन जो अमन बने तो,
सारे जहान की खुशियाँ पाए,
ये मन तो एक दर्पण है,
जो सच्ची सूरत दिखलाये,
कभी कभी तो देखो, इस मन को,
ये मन कितना सहमा हुआ है l
Thank You.

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