हर पल तुझे अपना कहूँ




हर पल तुझे अपना कहूँ, 
हर दम तुझे अपना कहूँ, 
ये जगत तो एक सपना है, 
यहाँ कौन पराया, कौन अपना है, 
ये जगत मुसाफिरखाना है, 
किसको यहाँ अपना कहूँ l

कुछ दिन की जिंदगानी है, 
कुछ पल की मेरी कहानी है, 
एक दिन तो जाना पड़ेगा जहान से, 
एक दिन तो सब छोड़ना पड़ेगा जहान से, 
मैं क्यों नही तेरी शरण पड़ूँ l

मैं क्या भूलूँ, क्या याद करूँ, 
यहाँ किसे भूलूँ, किसे याद करूँ,
दुनियाँ की याद से क्या सुख मिलता है, 
हर वक्त तुम्ही हो, तुझे याद करूँ, 
दिया है सब कुछ आपने सबकों, 
नित्य आपका ही आभार करूँ l


Thank You. 

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