ये जीवन कैसे चलता है
ये जीवन कैसे चलता है,
ये जीवन कैसे पलता है,
ये जीवन कैसे पलता है,
कोई न कोई इसका निर्माण करता है,
क्योंकि कोई ना कोई इसको चलाता है,
क्योंकि ना कोई इसका पालन करता है,
कोई ना कोई इसको हवा-पानी देता है,
अगर किसी चीज को कोई नही चलाये,
तो वह ऐसे ही खड़ी रहती है,
वह ऐसे ही पड़ी रहती है,
इस जीवन को चलाने वाली
एक अज्ञात शक्ति है,
जो इस शरीर में
आत्मारूप से शासन करती है,
इस संसार को चलाने वाली
एक अत्यन्त बलशाली शक्ति है,
जिसे लोग परमात्मा कहते हैं,
ये जीवन इसलिए चलता है,
क्योंकि यहाँ कोई ना कोई,
हर किसी का ख्याल रखता है,
क्योंकि यहाँ कोई ना कोई,
हर किसी का ख्याल रखता है,
हर कोई किसी ना किसी की
मदद से आगे बढ़ता है,
और सबसे बड़ी मदद तो
माता-पिता की है,
जो हमें इस संसार में लाते हैं,
बचपन में हमारा ख्याल रखते हैं,
हमें खाना खिलाते हैं,
हमें दूध पानी पिलाते हैं,
हमें बिमारियों से बचाते हैं,
हमें उँगली पकड़कर चलना सिखाते हैं,
हमें स्कूल-कालेज में डालते हैं,
हमें शिक्षा ग्रहण करने के लिए
गुरु के पास भेजते हैं,
जिससे हम जीवन में कामयाब होते हैं,
हमें उत्तम शिक्षा दिलाते हैं,
कदम-कदम पर हमारा मार्गदर्शन करते हैं,
हमें उत्तम जीवन देते हैं,
और परमात्मा तो हम सबका ख्याल रखते हैं,
हमें जीवन देते हैं, हमें हर चिंता से मुक्त रखते हैं,
हमें अन्न-धन, घर-परिवार, एव्ं इस संसार में
जीवन-यापन करने के लिए
सब प्रकार के सुख साधन देते हैं,
हमारे लिए किसी चीज की कमी नही छोड़ते हैं,
और हमारा जीवन आसान बना देते हैं,
इस जीवन का वास्तविक आनंद परमात्मा है,
वही जीवन का आश्रय है,
वही हमारी वास्तविक मंजिल है,
जिसने स्वयं को जान लिया,
उसने परमात्मा को जान लिया,
जो अनादि है, अनंत है,
असीम है, सूक्ष्म है, विराट है,
सबका ध्यान रखनेवाले हैं,
सबका ख्याल रखनेवाले हैं,
उस पर्मेश्वर प्रभुजी को कोटि-कोटि नमस्कार l
Thank You.

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