रे मन, अब तो समझ जरा



रे मन, अब तो समझ जरा, 
रे मन, अब तो शांत हो जरा, 
कितनी चर्चा, दुनियाँ की करेगा, 
कितनी बातें, दुनियाँ की करेगा, 
रे मन, अब तो मुक्त बन जरा l

ये जीवन है, हरिभजन को, 
ये जीवन है, हरि शरणम् को, 
इस जीवन मेें क्या खोना है, 
इस जीवन में क्या पाना है, 
रे मन, अब तो रुक जरा l

ये दुनियाँ तो है मतलब की, 
ये जिंदगी क्यों है बे मकसद की, 
हर कोई फिरता, अपनी धुन में, 
हर कोई रहता, मन ही मन में, 
अमन, तू खुद को समझ जरा l



Thank You. 

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