इस जीवन से क्या मिलता है
इस जीवन से क्या मिलता है,
कभी सुख मिलता है,
कभी दुख मिलता है,
जिनसे हैं अपेक्षाएँ,
उनसे ही दुख मिलता है l
अपना बनकर, यहाँ कोई छलता है,
बेगाना होकर यहाँ कोई छलता है,
किसका सहारा यहाँ पर दिखता,
कोई अपना बनकर भी अजनबी रहता है,
ऐसे ही चलता ये जीवन,
यहाँ किसका सिक्का चलता है l
इस झूठे संसार के अंदर,
कौन है अपना, कौन पराया,
किससे यहाँ पर प्रीत लगाए,
इस दुनियाँ से एक दिन चले जाना,
कभी चाहतें पूरी होती है,
कभी अधूरी रह जाती है,
क्या जीवन, ये कैसा जीवन,
सबको यहाँ पर मन छलता है l
Thank You.

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