जो कर दिया, खुद ही




जो कर दिया, खुद ही, 
तो उसका पछतावा क्या, 
जीवन बनाया है खुद ही, 
तो उसका पछतावा क्या ? 

किसी को दुख नही दिया, 
किसी को आहत नही किया, 
किसी से राग-द्वेष नही किया, 
किसी को चोटिल नही किया, 
किसी का नुकसान नही किया, 
तो फिर पछतावा क्या ? 

जब सारे जग को अपना समझा, 
जब किसी को नही बेगाना समझा, 
जब ईश्वर को अपना माना, 
जब गोविंद को अपना जाना, 
जब उसको ही अपना समझ लिया तो
फिर दुनियाँ में घबराना क्या ? 


Thank You. 

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