मन छोड़ दे, झूठी जिद्द तू
मन छोड़ दे, झूठी जिद्द तू,
मन काहे को व्याकुल तू,
तू जो सोचे, ये कर लूँगा,
तू जो समझे, ये पा लूँगा,
मिलता है वो, जो किस्मत में,
फिर काहे को, उलझन ये l
इस जीवन को सँवार ले तू,
इस जीवन में, खुशियाँ भर ले तू,
तेरी सारी सोच सही ना,
तेरे अंदर दोष रहे हाँ,
मन हरदम क्यों कल्पित तू l
सच्चाई तो यही है प्यारे,
इस दुनियाँ में, उलझन प्यारे,
पग-पग पर दुख के काँटे फैले,
और तू चाहे, सब अच्छा हो जाए,
अपनी छोड़, तू मान ले मेरी,
अमन, काहे को चिंतित तू l
Thank You.

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