कहीं से मन हटाया




कहीं से मन हटाया, 
तो कहीं और लगाया, 
कहीं खोया, कहीं पाया, 
कुछ खोया, कुछ पाया, 
फिर वही, लौटकर आया l

ये मन, ईधर-उधर घूमता रहता है, 
ये मन, अपनी मस्ती में घूमता रहता है, 
क्या-क्या ना जग में चाहा, 
फिर मन अपनी आदत में आया l

सोच तो अच्छी थी, 
मगर अंजाम सही ना था, 
जिंदगी तो अच्छी थी, 
मगर मुकाम सही ना था, 
इस मन ने क्या-क्या चाहा, 
नशा इस मन पे छाया l



Thank You. 

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