सेवा ही परमोधर्म

सेवा ही परमोधर्म, 
अपने किसी भी काम को, 
सेवा में बदल दो,
अपनी किसी भी कामना को, 
सेवा में लगा दो,
जो भी सोचो, दूसरों की 
भलाई के लिए सोचो, 
जो भी कहो, दूसरों की 
भलाई के लिए कहो, 
जो भी करो, दूसरों की 
भलाई की खातिर करो, 
अपने काम को दूसरों की 
भलाई में लगा दो l

अगर सोच बदल जाती है तो, 
जीवन बदल जाता है, 
अगर चाह मिट जाती है तो, 
दुनियाँ बदल जाती है, 
काम के बदले में, 
अपेक्षाएं हो जाती है, 
काम में लगकर, 
उपेक्षाएँ हो जाती है, 
अपने काम को औरो की, 
भलाई में लगा दो  l

जिस तरह सत्य परमोधर्म, 
अहिंसा परमोधर्म, 
वैसे सेवा ही परमोधर्म, 
सेवा तो मन-वचन-
कर्म से की जाती है, 
सेवा तो तन-मन-
धन से की जाती है, 
सेवा तो हर 
कर्म से की जाती है, 
अपने जीवन को 
औरों की सेवा में लगा दो l

ईश्वर-प्राप्ति का सबसे सुगम माध्यम सेवा है  l

Thank You. 

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