कुछ शांत मन, कुछ शांत तन
कुछ शांत मन, कुछ शांत तन,
कुछ शांत दिल, कुछ शांत जीवन,
शांति की तलाश में,
दुनियाँ फिरती है ईधर-उधर,
आनंद की तलाश में,
घूमती है दुनियाँ ईधर-उधर,
क्या मिलता है इस दुनियाँ से,
सुंदरता तो है खुद के अंदर,
बेचैनियाँ मिट जाए सारी,
परेशानियाँ मिट जाए सारी,
सुकून के कुछ पल मिट जाए,
मुश्किलें मिट जाए सारी,
सब कुछ पाने के बाद भी,
क्या चाहता है दुनियाँ से जन l
मन मुक्त है, तो जीवन अच्छा,
मन बंधन में है तो फिर क्या अच्छा,
हँसना-रोना चलता रहता,
पाना-खोना चलता रहता,
हर कोई लगा है काम में अपने,
फल तो सबको मिलता रहता,
जीते-जी छूटे, भव के बंधन,
जीते-जी छूटे, जग के बंधन,
मुक्त बनके जीये इंसान,
कोई राह में मुश्किल ना खड़ी करे मन l
दुनियाँ को तो बहुत देख लिया,
कुछ अपने अंदर देख तो लें,
दुनियाँ को तो बहुत जान लिया,
कुछ अपने को समझ तो लें,
दुनियाँ के लिए बहुत कर लिया,
कुछ अपने लिए कर तो लें,
सफर तमाम जिंदगी का,
दुनियाँ की खिदमत में गुजरा,
क्या मिला, इस दुनियाँ से,
क्या पाना बाकी रहा,
कर्म-विचारों से ही जिंदगी,
कर्म-विचार ही ये जीवन बदले,
क्या चाहिए, क्या नही चाहिए,
दुनियाँ में प्यारे, अब तो यह जान ले,
आनंद की तलाश में,
संसार सारा करता भर्मण l
Thank You.

Comments
Post a Comment