तेरा हर रूप स्वीकार है

तेरा हर रूप स्वीकार है, 
तेरी हर लीला स्वीकार है, 
तेरा हर रूप प्यारा है, 
तेरा स्वरूप अति प्यारा है, 
सत् चित आनंद स्वरूप परमात्मा, 
परमप्रकाश रूप परमात्मा, 
निर्गुण-सगुण परमात्मा, 
ब्रह्म रूप परमात्मा, 
तुम ही सद्गुरु, जगतगुरु, 
अंतर्यामी हरि परमात्मा, 
नित्य-नित्य है नमन आपको, 
तुम ही सबका प्राणाधार हो l

सारे ब्रहमांड के आप ही मालिक, 
कण-कण में आप ही फैले हो, 
निर्गुण-सगुण आप ही भगवन, 
सब लोकों में आप ही फैले हो, 
कुछ भी खाली नही आपसे, 
अंदर-बाहर आप ही हो, 
श्वासों के अंदर आप ही फिरते, 
हर दिल में आप समाए हो, 
कहाँ नही हो, जो में ढूँढूँ, 
तुम तो जीवन आधार हो l

तुम ही देव, देवों के मालिक, 
तुम एक सत्य हो, 
तुम ही ब्रहमा, तुम ही विष्णु, 
तुम ही महेश हो, 
जगत के रचने वाले गोविंद, 
तुम ही पालक, तुम ही संहारक हो, 
तेरा पार नही कोई भी पाता, 
तुम ही अनंत, अनंतरूप हो, 
कोई तुझको God है कहता, 
कोई अल्लाह, कोई वाहेगुरु कहे, 
कोई तुझको राम है कहता, 
कोई तुझको कृष्ण कहे, 
सब जगह मौजूद आप ही, 
जिसमें जितनी जैसी श्रद्धा, 
वैसे आप बन जाते हो, 
कभी ज्ञानी का ज्ञान हो बनते, 
कभी प्रेमियों का प्रेम बन जाते हो, 
सबमें आप बसनेवाले, 
आप ही नर-नारायण कहलाते हो, 
लीला तेरी समझ ना आवे, 
आप ही सुखसागर कहलाते हो, 
सबपे दयादृष्टि रखनेवाले, 
आप ही आनंदकन्द कहलाते हो, 
ज्ञान-विज्ञान से तृप्त आत्मा, 
आप ही हर मुश्किल से करते पार हो, 
हम तो आपकी शरण हे भगवन, 
तुम ही सबको करते पार हो l

Thank You. 

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