वो दिन भी क्या दिन थे
वो दिन भी क्या दिन थे,
जब बचपन में घूमा करते थे,
साथ थे जब बचपन के साथी,
मौज में फिरा करते थे l
ना फिक्र थी, कुछ करने की,
ना चिंता थी, इस दुनियाँ की,
घूमते थे ईधर-उधर,
कभी पैदल, कभी साइकिल पे,
दूर-दूर तक जाते थे घूमने,
कभी रुक जाते, कभी दौड़ लगाते,
मनमौजी बनकर फिरते थे l
गाँव का जीवन भी अजीब था,
सुबह-सुबह उठकर
जब उगते सूरज को देखा करते थे,
साँझ जब होती थी,
ढलते सूरज को ताका करते थे,
स्कूल जाना, मस्ती करना,
कुछ पढ़ लिया करते थे,
ना चिंता कोई दिखती थी,
जब सब इकठ्ठे रहते थे l
Thank You.

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