रुकी रुकी सी जिंदगी, फिर से आगे चल पड़ी, थकी थकी सी जिंदगी, जैसे नई ऊर्जा पा गई, ये जिंदगी फिर से चल पड़ी, जैसे नई जान इसमें आ गई, भूलकर जहान के गम, अपनी धुन में चल पड़ी l कुछ शांत मन, कुछ शांत जीवन, कुछ नया मन, कुछ नया जीवन, कुछ सपने पूरे हो रहे, कुछ ख्वाब उड़ान भर रहे, अपनों का जब साथ मिला, तो जिंदगी हँस के चल पड़ी l कुछ सोच नई, कुछ बात नई, कुछ चाह नई, कुछ राह नई, कुछ सोच लिया, कुछ कर लिया, कुछ खुशियों का माहौल बना, कुछ मंजिल के करीब हुए, कुछ मंजिल करीब आ गई l Thank you.
Aman's Poetry World Blog