इस जीवन को इतना समझा

इस जीवन को इतना समझा, 
ये जीवन तो है, खेल तमाशा, 
सब अच्छा चलता रहता है, 
कब क्या हो जाए पता नही, 
पलभर में बदले ये दुनियाँ, 
कब चलना हो जाए, यह पता नही  l

यहाँ सब कुछ छूटता जाता है, 
हाथों में कुछ भी नही रह पाता है, 
कभी खुशी तो, कभी गम आ जाता, 
कभी राह मिले, कभी रास्ते खो जाए, 
मंजिल की तलाश में घूमते रहते, 
क्या मिल पाए, कुछ पता नही  l

क्या पाये, क्या खो जाता है, 
क्या सोचे, क्या हो जाता है, 
आँखें बन्द करके, कभी जो सोचा, 
क्या करना था, क्या हो गया है, 
बेवजह की चिंताओं में, 
जीवन की घड़ियाँ, खो जाती है, 
एक जैसा समय नही रहता, 
कब मुश्किल आ जाए, यह पता नही l


Thank you. 


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