माया का बहुत अहंकार किया
माया का बहुत अहंकार किया,
काया का बहुत अहंकार किया,
काया का बहुत अहंकार किया,
एक दिन तो माया भी छूटे,
एक दिन तो काया भी छूटे,
फिर किस बात का अभिमान किया,
मन में बहुत अकड़ भरी है,
इस मन का बहुत अहंकार किया ।
इस जग में भागम-भाग लगी,
जैसे कहीं कोई आग लगी,
जैसे कहीं कोई आग लगी,
जैसे चिंताओं का ये जीवन है,
जैसे मुश्किलों का ये जीवन है,
क्यों नही, कोई सपना साकार किया ।
क्या पाया, जग की चिंता में,
क्या मिला, मन की व्यथा से,
हर दिन ऐसे ही गुजर रहा है,
स्वांस भी सारे गुजर रहे हैं,
नही कभी समय का सदुपयोग किया ।
क्या मिला, मन की व्यथा से,
हर दिन ऐसे ही गुजर रहा है,
स्वांस भी सारे गुजर रहे हैं,
नही कभी समय का सदुपयोग किया ।
Thank You.
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