अनंत यात्रा
*अनंत यात्रा*
आशा कभी न खत्म होती,
जीवन कभी न खत्म होता ।
देह भले ही मिट जाए,
पर आत्मा कभी न खत्म होती ।
पर आत्मा कभी न खत्म होती ।
जैसे पुराने वस्त्र बदलकर
नए वस्त्र पहनते हैं,
वैसे ही नए शरीर, नया जन्म
तेरे कर्मों से मिलते हैं ।
नए वस्त्र पहनते हैं,
वैसे ही नए शरीर, नया जन्म
तेरे कर्मों से मिलते हैं ।
जो तू करता है, वही बीज हैं
जो तय करेंगे तेरा अगला रूप:
कौन सा पथ, कौन सी धरती,
कैसा होगा तेरा स्वरूप ।
जो तय करेंगे तेरा अगला रूप:
कौन सा पथ, कौन सी धरती,
कैसा होगा तेरा स्वरूप ।
जब तक जीवन साथ तेरे,
तू चलेगा, तू घूमेगा,
कहीं ठहरेगा, कहीं सुस्ताएगा,
फिर उठकर यात्रा पर निकलेगा ।
तू चलेगा, तू घूमेगा,
कहीं ठहरेगा, कहीं सुस्ताएगा,
फिर उठकर यात्रा पर निकलेगा ।
जीवन जब संग हो तेरे,
ऊब का नाम नहीं होता।
हर कदम में अचरज छुपा है,
हर पल एक ज्योति होता ।
ऊब का नाम नहीं होता।
हर कदम में अचरज छुपा है,
हर पल एक ज्योति होता ।
देह भले ही कमज़ोर पड़े,
पर आत्मा बलवान रहे ।
पर आत्मा बलवान रहे ।
मन भले ही थक जाए कभी,
पर _तू_ तो चलता रहे ।
पर _तू_ तो चलता रहे ।
क्योंकि मन एक नदी है
जो आशा की ओर बहे,
और तू है वो यात्री
जो जीना सीख रहे ।
जो आशा की ओर बहे,
और तू है वो यात्री
जो जीना सीख रहे ।
तो चल, रुक, फिर चल पड़—
यह चक्र चलता जाएगा।
वस्त्र भले पुराने हो जाएँ,
पहनने वाला कभी न जाएगा ।
यह चक्र चलता जाएगा।
वस्त्र भले पुराने हो जाएँ,
पहनने वाला कभी न जाएगा ।
Thank You.
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