मेरे मन, कितना तू जग में दौड़ेगा

मेरे मन, कितना तू जग में दौड़ेगा,
मेरे मन, कहाँ-कहाँ तू दौड़ेगा,
तुझको यहाँ चैन नही है,
तुझको को कोई सब्र नही है,
मेरे मन, कब जिद्द तू अपनी छोड़ेगा ।

चल रही है, जीवन-सांसे,
किसलिए तू व्याकुल फिरता है,
किसलिए तू भूला फिरता है,
मेरे मन, कब तू चिंता छोड़ेगा ।

सदा सहारा जिस गोविंद का,
उसको तू भूला है ऐ मन,
सबका प्यारा, जो ईश्वर है,
उससे दूर हुआ है तू मन,
अमन, कब तक जग में भटकेगा ।


Thank You.

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