कैसे जीवन जी रहे हैं

कैसे जीवन जी रहे हैं,
किस तरह से जीवन जी रहे हैं,
कुछ तो जीने में आनंद हो,
कुछ तो दुनियाँ में रहने में आनंद हो,
यहाँ कैसे सपने बुन रहे हैं ।

क्या अपना है, क्या पराया है,
जो पास है अपने, वो है अपना,
जो दूर है, वो है पराया,
किस आस में जीवन जी रहे हैं ।

मन की जब आवाज मधुर हो,
मन में जब नही कोई फिक्र हो,
यादें भी जब मधुर-मधुर हो,
लबों पर जब की गीत मधुर हो,
फिर तो जहान में लगेगा,
जैसे खुशियों में से पल गुजर रहे हो ।


Thank You. 

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