Aman's Poetry World Blog
अगर आदमी आशावान नही हो तो जीवन कैसे चले,
अगर आदमी आशावान नही हो तो दुनियाँ कैसे चले,
आदमी आशाओं में रहकर ही तो आगे बढ़ पाता है,
आदमी मन को मजबूत करके ही तो आगे बढ़ पाता है,
अगर आदमी आशावान नही हो तो खुशियाँ कैसे मिले l
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